जब दुनिया चाँद ग्रहण का नज़ारा देख रही थी उस वक़्त कुछ मुसलमान …

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जब दुनिया चाँद ग्रहण का नज़ारा देख रही थी उस सैकड़ों मुसलमान इस घडी से नजात पाने और देश व दुनिया में शांति के लिए मस्जिद में रो रो कर दुआ कर रहे थे. 31 जनवरी 2018 को सूरज ढलते ही जहां पूरा भारत ही नहीं बल्कि नासा समेत पूरी दुनिया के लोग एक सदी बाद (100 साल) Super Blue Blood Moon की तस्वीरें अपने कैमरे और मोबाइल फोन में कैद करने में लगे हुए थे|

और उसका लाइव टेलीकास्ट देखने के लिए अपने टीवी चैनलों पर टकटकी बांधे हुए थे वहीं जामिया नगर स्थित मस्जिद अबू बकर सिद्दीक और कालिंदी कुंज स्थित मस्जिद उमर बिन खत्ताब में सैकड़ों मुसलमान इस घड़ी से निजात पाने और अल्लाह की पनाह में आने के लिए नमाज की अदायगी कर रहे थे|

इस अवसर पर मस्जिद अबू बकर सिद्दीक में कारी हलीम की अगुवाई में 72 मिनट के इस Super Blue Blood Moon (चांद ग्रहण) में 40 मिनट तक नमाज अदा की गई और लोगों ने रो-रो कर अल्लाह रब्बुल आलमीन से दुआएं कीं|

नमाज के बाद इस्लामी खुतबे का भी आयोजन किया गया. इस अवसर पर अपने भाषण में अबुल कलाम आजाद इस्लामिक अवेकनिंग सेंटर के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद रहमानी सनाबिली मदनी ने कहा कि चांद ग्रहण या सूर्य ग्रहण कोई आम बात नहीं है.

उन्होंने कहा कि चांद ग्रहण या सूर्य ग्रहण कयामत की निशानियों में से एक निशानी है. उन्होंने कहा कि इस अवसर पर अल्लाह के नबी उस वक्त तक मस्जिद में रह कर नमाज और दुआ करते जब तक कि चांद ग्रहण या सूरज ग्रहण हट नहीं जाता. उन्होंने इस अवसर पर मुसलमानों से अपील की कि वह अल्लाह से दुआ करें|

अल्लाह के नबी की मृत्यु हुई सुन्नत को जिंदा करने के लिए आगे आयें. मोहम्मद रहमानी ने अपने भाषण में कहा कि चांद ग्रहण या सूर्य ग्रहण यह हजारों साल पुरानी चीज है. उन्होंने कहा कि अल्लाह के नबी के जमाने में भी चांद ग्रहण या सूर्य ग्रहण हुए हैं और कयामत तक होते रहेंगे|

उन्होंने यह भी कहा कि हमें चाहिए कि इस अवसर पर हम इन सब चीजों से एक सबक लें और अपनी आने वाली नस्लों के साथ-साथ अपनी भी इसलाह (अच्छा) करें. इस अवसर पर उन्होंने बच्चों से अपील की कि वह अपने बड़ों और माता पिता का आदर करना सीखें.

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