जिस उम्मीदवार ने 16 साल तक राज्य के लिए अनशन किया , उसे जनता ने दिए हैं बस 90 वोट, ये खबर हैरान करने वाली है!

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इम्फाल: मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम सिंह इबोबी ने भाजपा के एल बसंत सिंह को 10,400 मतों से पराजित कर थोउबाल सीट पर जीत हासिल की. लेकिन इस सीट पर सबसे बड़ा झटका इरोम शर्मिला को लगा है. इस सीट से चुनाव लड़ रहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला को महज 90 वोट मिले हैं. इससे ज्यादा वोट नोटा के खाते में गया है. नोटा के लिए 166 वोट किए गए हैं.राज्य में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है.

दोपहर 1 बजे तक के रूझान और परिणामों के मुताबिक कांग्रेस ने नौ सीटों पर जीत दर्ज कर ली है और उसके उम्मीदवार इतनी ही सीटों पर आगे चल रहे हैं. भाजपा के चार उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है और पार्टी 10 सीटों पर आगे चल रही है.

सिंह ने थोउबाल सीट पर 10,400 मतों के अंतर से जीत दर्ज की. कांग्रेस नेता अब्दुल नसीर ने लिलोंग सीट पर 1,268 मतों से जीत दर्ज की के जयकिशन सिंह :कांग्रेस: ने थांगमेईबांद सीट पर 157 मत के मामूली अंतर से जीत दर्ज की. कोन्थाउजम सीट पर भाजपा के सापम रंजन सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के शारत सिंह को 2,772 मतों से पराजित किया.

कौन हैं इरोम शर्मिला

मणिपुर में 16 साल से आंदोलन कर रही ईरोम शर्मिला ने 2016 में अनशन तोड़ा था. 16 साल जिस AFSPA को हटाने के खिलाफ ईरोम सत्याग्रह के रास्ते पर चली थी वो AFSPA खत्म नहीं हुआ है. 44 साल की आयरन लेडी ईरोम शर्मिला पिछले 16 साल से नेजल ट्यूब के साथ अनशन पर थीं. सत्याग्रह करने वाली शर्मिला के शरीर में अन्न जल पहुंचाने का यही अकेला तरीका था.

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