शेयर करें

तक़रीबन 1400 सालो से एक शब्द जो की विवादो और झगडे का केन्द्र रहा है वह शब्द काफिर है खासतौर पर भारत में यह समाज जाता है की जो हिन्दू है वह निश्चित रूप से काफिर है और जो मुसलमान नहीं है वो उस का नाम भी काफिर है वास्तव में ऐसा नहीं है।

अगर कोई ऐसा समझता है तो वो गलत है हम काफी सालो से एक-दूसरे को शक की निगाहों से देख ते आये है इसलिए अब कोई बताये या न बताये ज्यादा तर हिन्दू यही मानते है की वो मुसलमानो की नजरो में वो काफिर है और कई मुसलमान भी यह गलतफेमी में है की जो कोई उन के धर्म को नहीं मानता वो भी काफिर है यह एक बहुत बड़ी गलत फेमी है।

Source

अगर काफिर शब्द को सही समझना है तो आप को कुरान की कुछ बुनियादी बातो को समझ ना होगा बल्कि हज़रत मोहम्मद नबी करीम ( सल्ल,) और उन के ज़माने की परिस्तियो को समझ ना होगा

वह जमाना केसा था जब अरब में घोर अंध्कार का युग था जगहे जगहे लड़ाई-झगडे मार काट लड़कियों का क़त्ल करना तभी नबी (सल्ल,) ने लोगो को सिखाया लड़ाई-झगड़े बंद करो भाई भाई की तरह रहो और पड़ना लिखना सीखो इल्म हासिल करो जुए शराब से दूर रहो। तो कुछ लोग उन्ही के दुसमन हो गए।

नबी करीम (सल्ल,) ने लोगो को यह भी सिखाया की खाना कैसे खाया जाता है बैठा कैसे जाता है कपडे
कैसे पहने जाते है और करोबार कैसे किया जाता है लोगो जिंदगी जीने का तरीका बताया और माँ बाप से केसा सुलूक करे बड़ो की इज़्ज़त करे और ओरतो उन के अधिकार के हक़ के बारे में बताया। नबी करीम (सल्ल,) ने ऐसी तमाम अच्छाइया लोगो को सिखाई इस की वजह से कुछ लोग उन्ही के दुसमन बन गए.

Source

हमने वो पूछते है की मुहम्मद (सल्ल) क्या कर रहे है उन लोगो को तो बुराइयो पर अभिमान हो चला था खुदके बराबर किसी को समझते नहीं थे। शराब पीते तो तब तक पीते जब तक की बेहोश न हो जाये छोटी छोटी बातो पर तलवार उठा लेते और ये जंग पीडियो दर पीडियो चली आ रही है.

भले ही बच्चो के लिए विरासत मै अनाज का एक दाना छोड़कर भी न जाये लेकिन दुश्मन का नाम लिख कर ज़रूर जाते प्यारे बेटे अगर तुमने फला दुश्मन की गर्दन न उतारी तो ज़िन्दगी मैं कुछ नही किया। अगर किसी का ऊट गलती से दूसरे कबीले मै चला जाता तो जंग छिड़ जाती थी लड़ने मारने से फुरसत नहीं थी इसलिए पढ़ाई लिखाई का सवाल ही नही उठता

ऐसे माहौल मै (सल्ल ) ने लोगो को बारीक से बारीक चीज़े बताई और जीने का सलीका सिखाया। कुछ लोग इस बात से छिड़ जाया करते थे वो अपनी पुरानी रीत जारी रखते उन्होंने मुहम्मद (सल्ल ) से दुश्मनी का एलान किया उन्हें बेघर कर दिया इतने से लोगो का मन नही भरा तो फ़ौज लेकर आये पर जंग लड़ी। वे मुहम्मद (सल्ल ) की हर बात को नकारते थे.

Source

मुहम्मद (सल्ल) के पैगम्बर होने से इनकार किया बुराई का बदला भलाई से लिया इस तरह ये नकारी करने वाले को काफ़िर कहते है उन्होंने ने मुहम्मद (सल्ल ) के क़त्ल का इरादा कर लिया पर कामयाब नही हो सके जिसने भी हमला किया उन्हें नुक्सान हुआ अपनी बुराईयो पर अकड़ दिखने वाले लोगो को काफ़िर कहते है.

इस्लाम मै जहा कही काफ़िर शब्द आया है वे उन्ही लोगो के लिए है अब मै भारत के हिन्दू भाइयो की बात करता हु, हमने हज़रात मुहम्मद(सल्ल ) को कोई तकलीफ नहीं पहुचाई और ना ही उन पर हमला किया. बेशक अरब या दुनिया के दूसरे दुसरे हिस्सो मै अज्ञान का अन्धकार था तब तो (सल्ल ) ने दुनिया को अच्छाई रास्ते पर चलने की सीख.

Comments

comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *